उत्थान नये भारत का शुरू हम सबसे ही मिलकर होगा। विश्व गुरू बने राष्ट्र अपना यह ध्यान ही मन... उत्थान नये भारत का शुरू हम सबसे ही मिलकर होगा। विश्व गुरू बने राष्ट्र अपन...
देश-विदेश में ख्याति फैली भारत अपना बदल रहा. देश-विदेश में ख्याति फैली भारत अपना बदल रहा.
निर्मल, कलकल धारा सी वसित उद्धरित ये साहित्य के आत्मा में समाहित निर्मल, कलकल धारा सी वसित उद्धरित ये साहित्य के आत्मा में समाहित
सिमट रही गरीबी बेरोज़गारी महँगाई अब रहेगा न कोई भूखा प्यासा आवाम देख लो सिमट रही गरीबी बेरोज़गारी महँगाई अब रहेगा न कोई भूखा प्यासा आवाम देख लो
पलती रही है जिंदगी निर्धन अमीर की यह सौ अरब जनों का सहारा है दोस्तो। पलती रही है जिंदगी निर्धन अमीर की यह सौ अरब जनों का सहारा है दोस्तो।
यह तो एक सुखद उपवन है, कलयुग के कहरों में। यह तो एक सुखद उपवन है, कलयुग के कहरों में।